बमो का आध्यात्मिक स्वर | कविता by शशांक शेखर
बमो का आध्यात्मिक स्वर बम गिरे स्कूलों परयूनिफार्म और टिफिन परशिथिल पड़ गए स्कूललंबे अंतराल के बादमिली सुकून भरी छुट्टी बम गिरे जलसों परखून से सने नारों परजलसा हुआ ज़मींदोज़प्राणों का मर्सियापढ़ रहा ऑर्केस्ट्रा बम गिरे घरों परधूप सेकते गीले कपड़ों परबिखर गए घरमकानों को घर कहा गयामकीनों को लावारिस…

