भारत की रक्षा करने वाले सरहद पर तैनात सैनिकों को समर्पित ” फौजी की कविता ” :-

फौजी की कविता

फौजी की कविता
नहीं मानता हूं मैं ऐसे,
अनुबंधों प्रतिबंधों को,
अरि दल मा का मस्तक छु ले,
हम याद करें संबंधों को ।।
हम भूलेंगे बैर भाव,
वो बैर भाव अपनाएंगे,
हमें करार का पाठ पढ़ाकर,
नियम हमें बताएंगे ।।
हम अपनी सीमा में रहकर,
अपना हित ना कर सकते,
और कोई निर्माण नया,
या नई उड़ान ना भर सकते ।
दोस्तगिरी या दादागिरी है,
कहो इसे हम क्या कह लें,
समझाने पर आंख दिखाएं,
कहो कहां तक चुप रह लें ।।
माना कि वो अस्त्र शस्त्र के,
ढेरों साज सजाएं हैं,
पर हम भी अब हिम्मत के,
बारूद लिए बढ़ आए हैं ।।
मंजूर नहीं तौहीन कोई,
ये धूर्त चीन ललकार रहा,
जिस भुजंग को पाला पोसा,
वही हमें फुफकार रहा ।।
मैं सैनिक हूं समझदार हूं,
पर दुश्मन ना समझ रहा,
हाथ खोल दो मेरे भी अब,
दुश्मन मुझसे उलझ रहा ।।
सत्य अहिंसा दया प्रेम,
और पंचशील हम लाए थे,
पर याद रहे की नाग दाह का,
यज्ञ हमीं करवाए थे ।।
तुम मतवाले हाथी हो,
तो मैं अंकुश लिए महावत हूं,
दुश्मन दल के लिए हमेशा,
मृत्यु भरी एक दावत हूं ।।
मैं रश्मिरथी का वंशज हूं,
निस्तेज नहीं हो सकता हूं,
प्राण त्याग कर सकता हूं,
पर आन नहीं खो सकता हूं ।।
माना हमने ज्ञान दिया,
दुनिया को धर्म औ नीति का,
पर अपराध नहीं सह सकते,
कायर कुटिल अनीति का ।।
तीस मार खां नहीं हैं वो,
जो हमें युद्ध कि धमकी दें।
जब चाहे जी चाहे उनका,
बढ़ चढ़ गीदड़ भभकी दें ।।
जो मर्यादा भूल चुके हों,
उन्हें युद्ध सिखलाना होगा,
उनके घर में ही अब उनको,
उनका दम दिखलाना होगा ।।
बहुत हो गया राजनीति,
और कूटनीति का सम्मोहन,
सैनिक हैं हम भारत के,
हम कर लेंगे उनका दोहन ।।
अगर पड़ोसी सरहद का,
सम्मान नहीं कर पाता हो,
और पड़ोसी पर ही अपने,
सारे घात लगाता हो ।।
हर करार को दरकिनार कर,
तीन कदम बढ़ जाता हो,
निर्विवाद करने विवाद को,
दो पग पैर हटाता हो ।।
और एक पग हथियाकर,
वो सज्जनता का दंभ भरे,
और कहे हम शांतिप्रिय हैं,
युद्ध नहीं आरंभ करे ।।
हम भी सारा खेल समझते,
चतुर नीति चतुराई की,
चोर छिपाकर मन में बैठे,
बात करे अच्छाई की ।।
यह निश्चित है चीन के मन में,
कुटिल खोट है धोखा है,
उसने पीछे से आकर के,
पीठ में छुरा भोका है ।।
वो समझे की हड़प नीति का,
ये ही अच्छा मौका है,
तो हम भी कुछ कर जाएं अब,
हमको किसने रोका है।।
बात यही उनके मन है तो,
हमे भी कुछ कर जाने दो,
मातृभूमि की बलि वेदी पर,
सिर मेरा चढ़ जाने दो ।।
मैं बलिदानी माता का बेटा,
मैं निश्चय निर्भय हूं,
अमर शहीदों की पंक्ति में,
प्राण लिए ज्योतिर्मय हूं ।।
अब हमको बतलाने दो,
हम सिंहो के संग खेल चुके हैं,
शब्दबाण और अग्निबाण की,
भी विस्फोटें झेल चुके हैं ।।
नहीं मुझे मंज़ूर है झुकना,
और ना ही मेरी परिपाटी है,
दुश्मन युद्ध को खड़ा है सन्मुख,
मातृभूमि अकुलाती है ।।
रण चंडी का आवाहन कर,
मां दुर्गा अवतारूंगा,
खप्पर वाली काली मां को,
मुंड माल सिर धारूंगा ।।
हमें मृत्यु का भय ना भाता,
उज्वल है इतिहास मेरा,
अमर वीर गाथाओं से है,
गूंज रहा आकाश मेरा ।।
धरा व्योम अग्नि जल वायु,
पांचों तत्व सहायक हो,
सृजन श्रृष्टि में मिट जाने को,
प्राण तत्व अधिनायक हो ।।
हमे हमारे देव याद है,
उन देवों कि देवकथाएं,
राम कृष्ण अर्जुन अंगद औ,
राणा शिवा की क्षमताएं ।।
अभिमन्यु का रणकौशल,
वो चन्द्रगुप्त चाणक्य हमारे,
पुष्यमित्र पोरस स्कन्दगुप्त,
और विक्रमादित्य सितारे।।
ललितादित्य वो हेमचंद्र,
रणजीत सिंह सब लड़े समर,
आल्हा ऊदल मलखा सुलखा,
वीरों से भी वीर प्रखर ।।
मणिकर्णिका झांसी वाली,
चेनम्मा का नाम अमर,
देश की रक्षा के हित लड़ गए,
भगत सुभाष वो चंशेखर ।।
तुम क्या समझो इस भारत में,
कितना तेज तपोबल है,
देश धर्म की रक्षा के हित,
कितना ज्यादा संबल है ।।
दस दस पे हम भारी होंगे,
और युद्ध सिखला देंगे
जो मनसा तुम लिए हो दिल में,
वही तुम्हे दिखला देंगे।।
हे सहनशील ये सहनशीलता,
का आडंबर छोड़ो जी,
दुश्मन की छाती पे चढ़के,
घमंड उसका तोड़ो जी
सरकारें यह साफ सुने,
अब हमे ना कोई बंधन दो,
दानव दल पर हम टूटेंगे,
हमें शस्त्र संवर्धन दो।।
सैनिक हैं हम राष्ट्र के हित हम,
अपना धर्म निभाएंगे,
अरिदल पर हम काल बनेंगे,
दल उनका खा जाएंगे ।।
और लड़ाई होगी तो अब,
रौद्र रूप निर्णायक होगा,
ये गांडीव टंकार करेगी,
और मृत्यु धनु-सायक होगा ।।
सीमाओं की रक्षा होगी,
और तिरंगा फहरेगा,
चंदन जैसी मिट्टी पर तब,
वीरों का मन ठहरेगा ।।
मातृभूमि की जय जय होगी,
तभी शांति आ पाएगी,
और तभी इस धरती से यह,
चीनी सेना जाएगी ।।
और अभी हम नहीं रुकेंगे,
नहीं झुकेंगे सरहद पर,
और प्रतिज्ञां का ब्रत हम भी,
पूर्ण करेंगे हर जिद पर ।।
और प्रतिज्ञां का ब्रत हम भी,
पूर्ण करेंगे हर जिद पर ।।।
और प्रतिज्ञां का ब्रत हम भी,
पूर्ण करेंगे हर जिद पर ।।।।
मातृभूमि नमो नमः
भारत माता की जय

रचनाकार का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव

धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश

स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई

शिक्षा – स्नातक

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धन्यवाद।

This Post Has 2 Comments

  1. Avatar
    अभिजित त्रिपाठी

    बहुत सुंदर कविता

    जय हिन्द

  2. Avatar
    Shaikh Mahemood

    Nice! Well said!

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